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mahabharat 15.33.4: पाण्डवों ने महान धनुर्धर कर्ण, सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्रों का बड़े हर्ष के साथ स्वागत किया ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 15.33: परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर राग-द्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजीमें गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 33: परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर राग-द्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजीमें गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  15.33.4 
पाण्डवास्तु महेष्वासं कर्णं सौभद्रमेव च।
सम्प्रहर्षात् समाजग्मुर्द्रौपदेयांश्च सर्वश:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों ने महान धनुर्धर कर्ण, सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्रों का बड़े हर्ष के साथ स्वागत किया ॥4॥
 
The Pandava met the great archer Karna, Subhadra's son Abhimanyu and Draupadi's five sons with great joy. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)