Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.33.28-29h: इतना ही नहीं, वह अपने प्रिय मित्रों से अनायास ही मिल जाएगा और उसे कोई दुःख या शोक नहीं सताएगा। जो विद्वान् मनुष्य धर्म के विशेषज्ञों में श्रेष्ठ विद्वानों को यह वृत्तांत सुनाएगा, वह इस लोक में यश और परलोक में सौभाग्य प्राप्त करेगा॥ 28 1/2॥ | mahabharat अध्याय 15.33: परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर राग-द्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजीमें गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इष्टबान्धवसंयोगमनायासमनामयम्।
यश्चैतच्छ्रावयेद् विद्वान् विदुषो धर्मवित्तम:॥ २८॥
स यश: प्राप्नुयाल्लोके परत्र च शुभां गतिम्।
अनुवाद
इतना ही नहीं, वह अपने प्रिय मित्रों से अनायास ही मिल जाएगा और उसे कोई दुःख या शोक नहीं सताएगा। जो विद्वान् मनुष्य धर्म के विशेषज्ञों में श्रेष्ठ विद्वानों को यह वृत्तांत सुनाएगा, वह इस लोक में यश और परलोक में सौभाग्य प्राप्त करेगा॥ 28 1/2॥
Not only this, he will meet his beloved friends without any effort and no sorrow or grief will torment him. The learned person who will narrate this episode to the scholars who are the best amongst the experts of Dharma, will achieve fame in this world and good fortune in the next world.॥ 28 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥