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mahabharat 15.33.24: वे सब क्षत्रिय कन्याएँ, जो चरित्रवान और उत्तम गुणों से युक्त थीं, समस्त उत्तम गुणों से विभूषित थीं, विमान पर चढ़कर अपने-अपने स्थानों को चली गईं। उनके सब क्लेश दूर हो गए॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 15.33: परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर राग-द्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजीमें गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 33: परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर राग-द्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजीमें गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  15.33.24 
ता: शीलगुणसम्पन्ना विमानस्था गतक्लमा:।
सर्वा: सर्वगुणोपेता: स्वस्थानं प्रतिपेदिरे॥ २४॥
 
 
अनुवाद
वे सब क्षत्रिय कन्याएँ, जो चरित्रवान और उत्तम गुणों से युक्त थीं, समस्त उत्तम गुणों से विभूषित थीं, विमान पर चढ़कर अपने-अपने स्थानों को चली गईं। उनके सब क्लेश दूर हो गए॥ 24॥
 
All those Kshatriya girls, endowed with character and good qualities, adorned with all the good qualities, boarded the plane and went to their respective places. All their troubles were dispelled.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)