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mahabharat 15.33.22: इस प्रकार वे सभी शीलवती एवं पतिव्रता क्षत्रिय स्त्रियाँ इस शरीर से मुक्त होकर अपने पतिलोक को चली गईं।   |   mahabharat अध्याय 15.33: परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर राग-द्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजीमें गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 33: परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर राग-द्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजीमें गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  15.33.22 
एवं क्रमेण सर्वास्ता: शीलवत्य: पतिव्रता:।
प्रविश्य क्षत्रिया मुक्ता जग्मुर्भर्तृसलोकताम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वे सभी शीलवती एवं पतिव्रता क्षत्रिय स्त्रियाँ इस शरीर से मुक्त होकर अपने पतिलोक को चली गईं।
 
In this way, all those Shilvati and devoted Kshatriya women got freed from this body and went to their husband's world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)