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mahabharat 15.33.21: प्रजानाथ! वहाँ वे सभी पतिव्रता स्त्रियाँ मानव शरीर से मुक्त होकर अपने पतियों के पास चली गईं।   |   mahabharat अध्याय 15.33: परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर राग-द्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजीमें गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 33: परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर राग-द्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजीमें गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  15.33.21 
विमुक्ता मानुषैर्देहैस्ततस्ता भर्तृभि: सह।
समाजग्मुस्तदा साध्व्य: सर्वा एव विशाम्पते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! वहाँ वे सभी पतिव्रता स्त्रियाँ मानव शरीर से मुक्त होकर अपने पतियों के पास चली गईं।
 
Prajanath! There all those pious women, after getting freedom from human bodies, joined their husbands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)