Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.33.12-14h: तब महर्षि व्यासजी ने उन सब लोगों को छोड़ दिया और महामनस्वी राजा सबके देखते-देखते क्षण भर में पवित्र भागीरथी नदी में गोता लगाकर अन्तर्धान हो गए। वे अपने-अपने रथों और ध्वजाओं सहित अपने-अपने लोकों को चले गए। 12-13 1/2। | mahabharat अध्याय 15.33: परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर राग-द्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजीमें गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब महर्षि व्यासजी ने उन सब लोगों को छोड़ दिया और महामनस्वी राजा सबके देखते-देखते क्षण भर में पवित्र भागीरथी नदी में गोता लगाकर अन्तर्धान हो गए। वे अपने-अपने रथों और ध्वजाओं सहित अपने-अपने लोकों को चले गए। 12-13 1/2।
Then the great sage Vyasji released all those people and in front of everyone, the great-minded king disappeared by diving into the holy river Bhagirathi in a moment. They went to their respective worlds along with their chariots and flags. 12-13 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥