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mahabharat 15.33.11-12h: वे बहादुर पुरुष और उनकी युवा पत्नियाँ एक रात साथ बिताने के बाद, एक-दूसरे की अनुमति लेकर और एक-दूसरे को गले लगाकर, जिस रास्ते से आए थे, उसी रास्ते से जाने के लिए तैयार हो गए।   |   mahabharat अध्याय 15.33: परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर राग-द्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजीमें गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 33: परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर राग-द्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजीमें गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  15.33.11-12h 
एकां रात्रीं विहृत्यैव ते वीरास्ताश्च योषित:॥ ११॥
आमन्त्र्यान्योन्यमाश्लिष्य ततो जग्मुर्यथागतम्।
 
 
अनुवाद
वे बहादुर पुरुष और उनकी युवा पत्नियाँ एक रात साथ बिताने के बाद, एक-दूसरे की अनुमति लेकर और एक-दूसरे को गले लगाकर, जिस रास्ते से आए थे, उसी रास्ते से जाने के लिए तैयार हो गए।
 
Those brave men and their young wives, after spending one night together, having taken each other's permission and embracing each other, prepared to leave the same way they had come. 11 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)