Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.33.1-2: वैशम्पायन कहते हैं - 'क्रोध और ईर्ष्या से रहित तथा निष्पाप वे सब महापुरुष ब्रह्मर्षियों द्वारा रचित उत्तम व्यवस्था का आश्रय लेकर परस्पर प्रेमपूर्वक मिले। उस समय उनके हृदय स्वर्ग में रहने वाले देवताओं के समान आनन्द से भर गए।॥1-2॥ | mahabharat अध्याय 15.33: परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर राग-द्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजीमें गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं - 'क्रोध और ईर्ष्या से रहित तथा निष्पाप वे सब महापुरुष ब्रह्मर्षियों द्वारा रचित उत्तम व्यवस्था का आश्रय लेकर परस्पर प्रेमपूर्वक मिले। उस समय उनके हृदय स्वर्ग में रहने वाले देवताओं के समान आनन्द से भर गए।॥1-2॥
Vaishampayana says, "All those great men, free from anger and jealousy and sinless, took recourse to the excellent system created by the Brahmarishis and met each other lovingly. At that time, their hearts were filled with joy like the gods living in heaven.॥ 1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥