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mahabharat 15.32.6: हे जनमेजय! तत्पश्चात् जल के भीतर से कौरवों और पाण्डवों की सेनाओं की वही भयंकर ध्वनियाँ पहले की भाँति आने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 15.32: व्यासजीके प्रभावसे कुरुक्षेत्रके युद्धमें मारे गये कौरव-पाण्डववीरोंका गङ्गाजीके जलसे प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 32: व्यासजीके प्रभावसे कुरुक्षेत्रके युद्धमें मारे गये कौरव-पाण्डववीरोंका गङ्गाजीके जलसे प्रकट होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  15.32.6 
तत: सुतुमुल: शब्दो जलान्ते जनमेजय।
प्रादुरासीद् यथापूर्वं कुरुपाण्डवसेनयो:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे जनमेजय! तत्पश्चात् जल के भीतर से कौरवों और पाण्डवों की सेनाओं की वही भयंकर ध्वनियाँ पहले की भाँति आने लगीं।
 
O Janamejaya! Thereafter, the same terrifying sounds of the armies of the Kauravas and the Pandavas began to emerge from within the water as before.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)