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mahabharat 15.32.14-15: प्रत्येक योद्धा अपने-अपने वेश, ध्वज और वाहन से सुसज्जित दिखाई दे रहा था। वहाँ उपस्थित सभी राजा दिव्य वस्त्र पहने हुए थे। सभी के कानों में चमकते हुए कुण्डल शोभायमान थे। उस समय उन्होंने शत्रुता, अहंकार, क्रोध और ईर्ष्या का त्याग कर दिया था। 14-15।   |   mahabharat अध्याय 15.32: व्यासजीके प्रभावसे कुरुक्षेत्रके युद्धमें मारे गये कौरव-पाण्डववीरोंका गङ्गाजीके जलसे प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 32: व्यासजीके प्रभावसे कुरुक्षेत्रके युद्धमें मारे गये कौरव-पाण्डववीरोंका गङ्गाजीके जलसे प्रकट होना  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  15.32.14-15 
यस्य वीरस्य यो वेषो यो ध्वजो यच्च वाहनम्।
तेन तेन व्यदृश्यन्त समुपेता नराधिपा:॥ १४॥
दिव्याम्बरधरा: सर्वे सर्वे भ्राजिष्णुकुण्डला:।
निर्वैरा निरहंकारा विगतक्रोधमत्सरा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
प्रत्येक योद्धा अपने-अपने वेश, ध्वज और वाहन से सुसज्जित दिखाई दे रहा था। वहाँ उपस्थित सभी राजा दिव्य वस्त्र पहने हुए थे। सभी के कानों में चमकते हुए कुण्डल शोभायमान थे। उस समय उन्होंने शत्रुता, अहंकार, क्रोध और ईर्ष्या का त्याग कर दिया था। 14-15।
 
Every warrior appeared to be dressed in whatever attire, whatever flag and whatever vehicle he had. All the kings who appeared there were wearing divine clothes. Shining earrings adorned everyone's ears. At that time they had given up enmity, arrogance, anger and jealousy. 14-15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)