श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 31: व्यासजीके द्वारा धृतराष्ट्र आदिके पूर्वजन्मका परिचय तथा उनके कहनेसे सब लोगोंका गङ्गा-तटपर जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  15.31.8 
गन्धर्वराजो यो धीमान् धृतराष्ट्र इति श्रुत:।
स एव मानुषे लोके धृतराष्ट्र: पतिस्तव॥ ८॥
 
 
अनुवाद
गंधर्वलोक में विख्यात बुद्धिमान गंधर्वराज धृतराष्ट्र तुम्हारे पति धृतराष्ट्र के रूप में मनुष्य लोक में अवतरित हुए हैं॥8॥
 
The wise Gandharva king Dhritarashtra, who is famous in the world of Gandharvas, has incarnated in the human world in the form of your husband Dhritarashtra. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)