श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 31: व्यासजीके द्वारा धृतराष्ट्र आदिके पूर्वजन्मका परिचय तथा उनके कहनेसे सब लोगोंका गङ्गा-तटपर जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  15.31.4 
न ते शोच्या महात्मान: सर्व एव नरर्षभा:।
क्षत्रधर्मपरा: सन्तस्तथा हि निधनं गता:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा क्षत्रिय होने के कारण तुम्हें उन महामनस्वी, श्रेष्ठ पुरुषोत्तम योद्धाओं के लिए कभी शोक नहीं करना चाहिए, जो वीरगति को प्राप्त हुए हैं॥4॥
 
Being a devout Kshatriya, you should never mourn for all those great-minded, best of men warriors who attained martyrdom accordingly. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)