श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 31: व्यासजीके द्वारा धृतराष्ट्र आदिके पूर्वजन्मका परिचय तथा उनके कहनेसे सब लोगोंका गङ्गा-तटपर जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  15.31.3 
पूर्वमेवैष हृदये व्यवसायोऽभवन्मम।
यदास्मि चोदितो राज्ञा भवत्या पृथयैव च॥ ३॥
 
 
अनुवाद
राजा धृतराष्ट्र, आपने और कुन्ती ने जब मुझसे ऐसा करने के लिए कहा, उससे पहले ही मेरे हृदय में यह (मृतकों के दर्शन कराने का) निश्चय हो चुका था॥3॥
 
Even before King Dhritarashtra, you and Kunti urged me to do so, this (of providing darshan of the dead) was already decided in my heart. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)