श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 31: व्यासजीके द्वारा धृतराष्ट्र आदिके पूर्वजन्मका परिचय तथा उनके कहनेसे सब लोगोंका गङ्गा-तटपर जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  15.31.20 
वैशम्पायन उवाच
इति व्यासस्य वचनं श्रुत्वा सर्वो जनस्तदा।
महता सिंहनादेन गङ्गामभिमुखो ययौ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन ! महर्षि व्यास के ये वचन सुनकर सब लोग हर्षपूर्वक महान सिंहनाद करते हुए गंगाजी के तट की ओर चले॥20॥
 
Vaishampayanji says – King! Hearing these words of Maharishi Vyas, everyone happily moved towards the banks of Ganga making great lion noises. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)