श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 31: व्यासजीके द्वारा धृतराष्ट्र आदिके पूर्वजन्मका परिचय तथा उनके कहनेसे सब लोगोंका गङ्गा-तटपर जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  15.31.2 
कर्णं द्रक्ष्यति कुन्ती च सौभद्रं चापि यादवी।
द्रौपदी पञ्च पुत्रांश्च पितॄन् भ्रातॄंस्तथैव च॥ २॥
 
 
अनुवाद
कुंती कर्ण को देखेगी, सुभद्रा अभिमन्यु को देखेगी और द्रौपदी पांचों पुत्रों, पिता और भाइयों को देखेगी। 2.
 
Kunti will see Karna, Subhadra will see Abhimanyu and Draupadi will see the five sons, father and brothers. 2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)