श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 31: व्यासजीके द्वारा धृतराष्ट्र आदिके पूर्वजन्मका परिचय तथा उनके कहनेसे सब लोगोंका गङ्गा-तटपर जाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  15.31.10 
कलिं दुर्योधनं विद्धि शकुनिं द्वापरं तथा।
दु:शासनादीन् विद्धि त्वं राक्षसान् शुभदर्शने॥ १०॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन को कलियुग और शकुनि को द्वापर समझो। आपको कामयाबी मिले! अपने दुःशासन तथा अन्य पुत्रों को राक्षस समझो।
 
Consider Duryodhana as Kaliyuga and Shakuni as Dwapar. Good luck! Consider your Dushasan and other sons as demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)