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mahabharat 15.30.6: भद्रे! तुम धर्म की जननी होओगी। शुभान्ने! जिन देवताओं का तुम आह्वान करोगी, वे तुम्हारे वश में हो जायेंगे। 6॥   |   mahabharat अध्याय 15.30: कुन्तीका कर्णके जन्मका गुप्त रहस्य बताना और व्यासजीका उन्हें सान्त्वना देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.30.6 
धर्मस्य जननी भद्रे भवित्री त्वं शुभानने।
वशे स्थास्यन्ति ते देवा यांस्त्वमावाहयिष्यसि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भद्रे! तुम धर्म की जननी होओगी। शुभान्ने! जिन देवताओं का तुम आह्वान करोगी, वे तुम्हारे वश में हो जायेंगे। 6॥
 
Bhadre! You will be the mother of religion. Shubhanane! The gods you invoke will come under your control. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)