Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.30.4: इससे वरदान देने वाले महर्षि मुझ पर बहुत प्रसन्न हुए और जब उनका कार्य पूर्ण हो गया, तो उन्होंने कहा - 'तुम्हें मेरे द्वारा दिया गया वरदान स्वीकार करना होगा।'॥4॥ | mahabharat अध्याय 15.30: कुन्तीका कर्णके जन्मका गुप्त रहस्य बताना और व्यासजीका उन्हें सान्त्वना देना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स प्रीतो वरदो मेऽभूत् कृतकृत्यो महामुनि:।
अवश्यं ते गृहीतव्यमिति मां सोऽब्रवीद् वच:॥ ४॥
अनुवाद
इससे वरदान देने वाले महर्षि मुझ पर बहुत प्रसन्न हुए और जब उनका कार्य पूर्ण हो गया, तो उन्होंने कहा - 'तुम्हें मेरे द्वारा दिया गया वरदान स्वीकार करना होगा।'॥4॥
Due to this, the great sage who gives boons was very pleased with me. When his work was completed, he said - 'You will have to accept the boon given by me.' ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥