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mahabharat 15.30.24: बलवान का सब काम कल्याणकारी होता है। बलवान का सब काम पवित्र होता है। बलवान का सब काम धर्ममय होता है और बलवान के लिए सब कुछ अपना होता है।॥24॥   |   mahabharat अध्याय 15.30: कुन्तीका कर्णके जन्मका गुप्त रहस्य बताना और व्यासजीका उन्हें सान्त्वना देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 30: कुन्तीका कर्णके जन्मका गुप्त रहस्य बताना और व्यासजीका उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  15.30.24 
सर्वं बलवतां पथ्यं सर्वं बलवतां शुचि।
सर्वं बलवतां धर्म: सर्वं बलवतां स्वकम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
बलवान का सब काम कल्याणकारी होता है। बलवान का सब काम पवित्र होता है। बलवान का सब काम धर्ममय होता है और बलवान के लिए सब कुछ अपना होता है।॥24॥
 
‘Everything of the strong is good or beneficial. All the work of the strong is pure. Everything of the strong is righteousness and all things are their own for the strong.’॥ 24॥
 
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि पुत्रदर्शनपर्वणि व्यासकुन्तीसंवादे त्रिंशोऽध्याय:॥ ३०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत पुत्रदर्शनपर्वमें व्यास और कुन्तीका संवादविषयक तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)