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mahabharat 15.30.20: कुन्ती के ऐसा कहने पर वेदों में श्रेष्ठ महर्षि व्यास ने कहा, 'पुत्री! तुमने जो कुछ कहा है, वह ठीक है। वह बड़ी होनहार कन्या थी।'   |   mahabharat अध्याय 15.30: कुन्तीका कर्णके जन्मका गुप्त रहस्य बताना और व्यासजीका उन्हें सान्त्वना देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.30.20 
इत्युक्त: प्रत्युवाचेदं व्यासो वेदविदां वर:।
साधु सर्वमिदं भाव्यमेवमेतद् यथाऽऽत्थ माम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
कुन्ती के ऐसा कहने पर वेदों में श्रेष्ठ महर्षि व्यास ने कहा, 'पुत्री! तुमने जो कुछ कहा है, वह ठीक है। वह बड़ी होनहार कन्या थी।'
 
On Kunti saying this, the great sage Vyasa, the best amongst the scholars of Vedas, said, 'Daughter! Whatever you have said is correct. She was such a promising girl.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)