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श्लोक  15.30.19 
यच्चास्य राज्ञो विदितं हृदिस्थं भवतोऽनघ।
तं चायं लभतां काममद्यैव मुनिसत्तम॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे महान एवं निष्पाप ऋषिवर! आप इस महाराज के हृदय की बात जानते हैं। कृपया इन्हें ऐसा आशीर्वाद दें कि आज ही इनकी मनोकामना पूर्ण हो जाए।
 
O great and innocent sage! You know what is in the heart of this Maharaja. Kindly bless him with such blessings that he gets his wish today itself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)