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mahabharat 15.3.9-10h: मेरी ये दोनों भुजाएँ चन्दन से सुशोभित हैं और चन्दन से ही सुशोभित होने योग्य हैं, जिनके द्वारा राजा दुर्योधन अपने पुत्रों और सम्बन्धियों सहित नष्ट हो गया ॥9 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 15.3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  15.3.9-10h 
ताविमौ चन्दनेनाक्तौ चन्दनार्हौ च मे भुजौ॥ ९॥
याभ्यां दुर्योधनो नीत: क्षयं ससुतबान्धव:।
 
 
अनुवाद
मेरी ये दोनों भुजाएँ चन्दन से सुशोभित हैं और चन्दन से ही सुशोभित होने योग्य हैं, जिनके द्वारा राजा दुर्योधन अपने पुत्रों और सम्बन्धियों सहित नष्ट हो गया ॥9 1/2॥
 
These two arms of mine are adorned with sandalwood and are worthy of being adorned with sandalwood, through which King Duryodhana along with his sons and relatives were destroyed.' 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)