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mahabharat 15.3.87: जब महाराज धृतराष्ट्र युधिष्ठिर से ये बातें कह रहे थे, तभी सत्यवती के पुत्र महर्षि व्यास वहाँ आये और इस प्रकार कहने लगे।   |   mahabharat अध्याय 15.3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  15.3.87 
इति ब्रुवति राजेन्द्रे धृतराष्ट्रे युधिष्ठिरम्।
ऋषि: सत्यवतीपुत्रो व्यासोऽभ्येत्य वचोऽब्रवीत्॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
जब महाराज धृतराष्ट्र युधिष्ठिर से ये बातें कह रहे थे, तभी सत्यवती के पुत्र महर्षि व्यास वहाँ आये और इस प्रकार कहने लगे।
 
While Maharaja Dhritarashtra was saying these things to Yudhishthira, the sage Vyasa, son of Satyavati, arrived there and began speaking thus.
 
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि धृतराष्ट्रनिर्वेदे तृतीयोऽध्याय:॥ ३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें धृतराष्ट्रका निर्वेदविषयक तीसरा अध्याय पूरा हुआ॥ ३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)