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mahabharat 15.3.86: तब पराक्रमी धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर से कहा, 'बेटा, यदि आप मुझे वन में जाने की अनुमति दें तो मैं भोजन करूंगा; यही मेरी इच्छा है।'   |   mahabharat अध्याय 15.3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  15.3.86 
ततोऽब्रवीन्महातेजा धृतराष्ट्रो युधिष्ठिरम्।
अनुज्ञातस्त्वया पुत्र भुञ्जीयामिति कामये॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
तब पराक्रमी धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर से कहा, 'बेटा, यदि आप मुझे वन में जाने की अनुमति दें तो मैं भोजन करूंगा; यही मेरी इच्छा है।'
 
Then the mighty Dhritarashtra said to Yudhishthira, 'Son, if you allow me to go to the forest, I will eat food; this is my wish.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)