Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.3.81: जब कौरवराज धृतराष्ट्र पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर से ये वचन कह रहे थे, तब वहाँ उपस्थित समस्त योद्धा जोर-जोर से विलाप करने लगे ॥ 81॥   |   mahabharat अध्याय 15.3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  15.3.81 
तस्मिंस्तु कौरवेन्द्रे तं तथा ब्रुवति पाण्डवम्।
सर्वेषामेव योधानामार्तनादो महानभूत्॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
जब कौरवराज धृतराष्ट्र पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर से ये वचन कह रहे थे, तब वहाँ उपस्थित समस्त योद्धा जोर-जोर से विलाप करने लगे ॥ 81॥
 
When the Kaurava King Dhritarashtra was saying these words to Yudhishthira, son of Pandu, all the warriors present there started wailing loudly. ॥ 81॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)