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mahabharat 15.3.66: यदि महिमामयी देवी गांधारी और राजा धृतराष्ट्र भोजन न करें, तो मैं भी अपने गुरुजनों के समान व्रत करूँगा ॥66॥   |   mahabharat अध्याय 15.3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  15.3.66 
अहमप्युपवत्स्यामि यथैवायं गुरुर्मम।
यदि राजा न भुङ्‍क्तेऽयं गान्धारी च यशस्विनी॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
यदि महिमामयी देवी गांधारी और राजा धृतराष्ट्र भोजन न करें, तो मैं भी अपने गुरुजनों के समान व्रत करूँगा ॥66॥
 
If the glorious goddess Gandhari and king Dhritarashtra do not eat, then I too will fast like my teachers. ॥ 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)