Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.3.28-29h: हमारे सौ पुत्र, जिन्होंने युद्ध में पीठ नहीं दिखाई, मारे गए हैं, परंतु मुझे उनके लिए कोई दुःख नहीं है, क्योंकि वे क्षत्रिय धर्म को जानते थे (और उसी के अनुसार युद्ध में प्राणों का बलिदान दिया)।॥28 1/2॥ | mahabharat अध्याय 15.3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हतं शतं तु पुत्राणां ययोर्युद्धेऽपलायिनाम्॥ २८॥
नानुतप्यामि तच्चाहं क्षत्रधर्मं हि ते विदु:।
अनुवाद
हमारे सौ पुत्र, जिन्होंने युद्ध में पीठ नहीं दिखाई, मारे गए हैं, परंतु मुझे उनके लिए कोई दुःख नहीं है, क्योंकि वे क्षत्रिय धर्म को जानते थे (और उसी के अनुसार युद्ध में प्राणों का बलिदान दिया)।॥28 1/2॥
Our hundred sons, who did not turn their backs in the war, have been killed, but I do not feel sorry for them because they knew the Kshatriya Dharma (and sacrificed their lives in the war according to that).॥ 28 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥