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mahabharat 15.3.20-21h: विदुर, भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, महात्मा भगवान व्यास, संजय और गांधारी देवी ने भी मुझे हर कदम पर उचित सलाह दी, लेकिन मैंने किसी की बात नहीं मानी। यह भूल मुझे हमेशा दुःख देती है।   |   mahabharat अध्याय 15.3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  15.3.20-21h 
विदुरेणाथ भीष्मेण द्रोणेन च कृपेण च।
पदे पदे भगवता व्यासेन च महात्मना॥ २०॥
संजयेनाथ गान्धार्या तदिदं तप्यते च माम्।
 
 
अनुवाद
विदुर, भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, महात्मा भगवान व्यास, संजय और गांधारी देवी ने भी मुझे हर कदम पर उचित सलाह दी, लेकिन मैंने किसी की बात नहीं मानी। यह भूल मुझे हमेशा दुःख देती है।
 
Vidura, Bhishma, Dronacharya, Kripacharya, the great soul Lord Vyasa, Sanjaya and Gandhari Devi also gave me proper advice at every step, but I did not listen to anyone. This mistake always causes me pain. 20 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)