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mahabharat 15.3.17-18h: दुर्योधन का मन दुष्टता से भरा था। वह अपने भाइयों के लिए आतंक का कारण था, फिर भी मुझ मूर्ख ने उसे कौरवों के सिंहासन पर अभिषिक्त किया। 17 1/2   |   mahabharat अध्याय 15.3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.3.17-18h 
योऽहं दुष्टमतिं मन्दो ज्ञातीनां भयवर्धनम्॥ १७॥
दुर्योधनं कौरवाणामाधिपत्येऽभ्यषेचयम्।
 
 
अनुवाद
दुर्योधन का मन दुष्टता से भरा था। वह अपने भाइयों के लिए आतंक का कारण था, फिर भी मुझ मूर्ख ने उसे कौरवों के सिंहासन पर अभिषिक्त किया। 17 1/2
 
Duryodhan's mind was full of evil. He was a terror to his brothers, yet I, the fool, anointed him to the throne of the Kauravas. 17 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)