Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.3.15-16h: तत्पश्चात् धृतराष्ट्र ने अपने मित्रों को बुलाया और नेत्रों में आँसू भरकर तथा रुँधे हुए स्वर में इस प्रकार बोले।   |   mahabharat अध्याय 15.3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  15.3.15-16h 
तत: समानयामास धृतराष्ट्र: सुहृज्जनम्॥ १५॥
वाष्पसंदिग्धमत्यर्थमिदमाह च तान् भृशम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् धृतराष्ट्र ने अपने मित्रों को बुलाया और नेत्रों में आँसू भरकर तथा रुँधे हुए स्वर में इस प्रकार बोले।
 
Thereafter Dhritarashtra called his friends and with tears in his eyes and in a very choked voice spoke thus. 15 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)