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mahabharat 15.3.13-14h: कुंतीपुत्र राजा युधिष्ठिर को इसका ज्ञान नहीं था। यहाँ तक कि अर्जुन, कुंती और यशस्वी द्रौपदी को भी इसका ज्ञान नहीं था। 13 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 15.3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  15.3.13-14h 
नान्वबुध्यत तद् राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:॥ १३॥
श्वेताश्वो वाथ कुन्ती वा द्रौपदी वा यशस्विनी।
 
 
अनुवाद
कुंतीपुत्र राजा युधिष्ठिर को इसका ज्ञान नहीं था। यहाँ तक कि अर्जुन, कुंती और यशस्वी द्रौपदी को भी इसका ज्ञान नहीं था। 13 1/2॥
 
Kunti's son King Yudhishthira was not aware of this. Even Arjun, Kunti and famous Draupadi did not know about this. 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)