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mahabharat 15.3.12-13h: उस समय तक वे राजा युधिष्ठिर के संरक्षण में पंद्रह वर्ष बिता चुके थे। पंद्रहवें वर्ष के पश्चात् भीमसेन के वाक्पटु प्रहारों से पीड़ित होकर राजा धृतराष्ट्र दुःखी और विरक्त हो गए॥ 12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 15.3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  15.3.12-13h 
तत: पञ्चदशे वर्षे समतीते नराधिप:॥ १२॥
राजा निर्वेदमापेदे भीमवाग्बाणपीडित:।
 
 
अनुवाद
उस समय तक वे राजा युधिष्ठिर के संरक्षण में पंद्रह वर्ष बिता चुके थे। पंद्रहवें वर्ष के पश्चात् भीमसेन के वाक्पटु प्रहारों से पीड़ित होकर राजा धृतराष्ट्र दुःखी और विरक्त हो गए॥ 12 1/2॥
 
By that time he had spent fifteen years under the protection of King Yudhishthira. After the fifteenth year, King Dhritarashtra, afflicted by Bhimasena's verbal attacks, felt sad and detached.॥ 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)