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mahabharat 15.3.10-11h: राजा धृतराष्ट्र ने भीमसेन के ये तथा अन्य अनेक कठोर वचन सुने, जो उनके हृदय में काँटों के समान चुभ रहे थे। उन्हें सुनकर वे अत्यन्त दुःखी हुए।   |   mahabharat अध्याय 15.3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.3.10-11h 
एताश्चान्याश्च विविधा: शल्यभूता नराधिप:॥ १०॥
वृकोदरस्य ता वाच: श्रुत्वा निर्वेदमागमत्।
 
 
अनुवाद
राजा धृतराष्ट्र ने भीमसेन के ये तथा अन्य अनेक कठोर वचन सुने, जो उनके हृदय में काँटों के समान चुभ रहे थे। उन्हें सुनकर वे अत्यन्त दुःखी हुए।
 
King Dhritarashtra heard these and many other harsh words spoken by Bhimasena which were like thorns piercing his heart. He was very saddened on hearing them. 10 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)