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श्री महाभारत
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पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व
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अध्याय 28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना
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श्लोक 7
श्लोक
15.28.7
कच्चिद् धर्मसुतो राजा त्वया प्रत्यभिनन्दित:।
भीमार्जुनयमाश्चैव कच्चिदेतेऽपि सान्त्विता:॥ ७॥
अनुवाद
क्या तुमने धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर को नमस्कार किया है? क्या तुमने भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव को भी सान्त्वना दी है?॥7॥
‘Have you greeted King Yudhishthira, the son of Dharma? Have you consoled Bhima, Arjuna, Nakula and Sahadeva as well?॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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