श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  15.28.5 
महाप्रज्ञा बुद्धिमती देवी धर्मार्थदर्शिनी।
आगमापायतत्त्वज्ञा कच्चिदेषा न शोचति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
गांधारी अत्यंत बुद्धिमान और महान विदुषी हैं। यह देवी धर्म और अर्थ को समझती हैं तथा जन्म-मृत्यु का सार जानती हैं। इन्हें कभी दुःख नहीं होता। 5॥
 
Gandhari is very intelligent and a great scholar. This goddess understands religion and meaning and knows the essence of birth and death. He never feels sad. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)