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mahabharat 15.28.24: आज मैं वह अद्भुत कार्य करूँगा जो संसार में पूर्वकाल के किसी भी महान ऋषि ने नहीं किया। आज मैं तुम्हें अपनी तपस्या का अद्भुत फल दिखाऊँगा॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 15.28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  15.28.24 
न कृतं यै: पुरा कैश्चित् कर्म लोके महर्षिभि:।
आश्चर्यभूतं तपस: फलं तद् दर्शयामि व:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
आज मैं वह अद्भुत कार्य करूँगा जो संसार में पूर्वकाल के किसी भी महान ऋषि ने नहीं किया। आज मैं तुम्हें अपनी तपस्या का अद्भुत फल दिखाऊँगा॥ 24॥
 
‘Today I will perform the miraculous deeds that no great sage of the past had performed in the world. Today I will show you the astonishing results of my penance.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)