श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  15.28.23 
त्वां चापि श्रेयसा योक्ष्ये न चिराद् भरतर्षभ।
संशयच्छेदनार्थाय प्राप्तं मां विद्धि पुत्रक॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! अब मैं शीघ्र ही तुम्हें सौभाग्य का भागी बनाऊँगा। पुत्र! तुम जान लो कि इस समय मैं तुम्हारा संदेह दूर करने आया हूँ॥ 23॥
 
Bharat's best! Now I will soon make you a part of good fortune. Son! You should know that at this time I have come to clear your doubts.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)