Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.28.21: जिसे धर्म कहा जाता है, वह विदुर था और जो विदुर था, वह यह पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर है, जो अब सेवक की तरह आपके सामने खड़ा है।   |   mahabharat अध्याय 15.28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  15.28.21 
यो हि धर्म: स विदुरो विदुरो य: स पाण्डव:।
स एष राजन् दृश्यस्ते पाण्डव: प्रेष्यवत् स्थित:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जिसे धर्म कहा जाता है, वह विदुर था और जो विदुर था, वह यह पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर है, जो अब सेवक की तरह आपके सामने खड़ा है।
 
The one who is called Dharma was Vidur and the one who was Vidur is this Pandu's son Yudhishthir, who is now standing before you like a servant.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)