vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व
»
अध्याय 28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना
»
श्लोक 21
श्लोक
15.28.21
यो हि धर्म: स विदुरो विदुरो य: स पाण्डव:।
स एष राजन् दृश्यस्ते पाण्डव: प्रेष्यवत् स्थित:॥ २१॥
अनुवाद
जिसे धर्म कहा जाता है, वह विदुर था और जो विदुर था, वह यह पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर है, जो अब सेवक की तरह आपके सामने खड़ा है।
The one who is called Dharma was Vidur and the one who was Vidur is this Pandu's son Yudhishthir, who is now standing before you like a servant.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×