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mahabharat 15.28.18: जिन अनन्त बुद्धिमान् और ज्ञानी भगवान् ने योगबल से कुरुराज युधिष्ठिर को जन्म दिया, वे धर्म विदुर स्वरूप हैं ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 15.28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  15.28.18 
येन योगबलाज्जात: कुरुराजो युधिष्ठिर:।
धर्म इत्येष नृपते प्राज्ञेनामितबुद्धिना॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जिन अनन्त बुद्धिमान् और ज्ञानी भगवान् ने योगबल से कुरुराज युधिष्ठिर को जन्म दिया, वे धर्म विदुर स्वरूप हैं ॥18॥
 
The infinitely intelligent and wise God who gave birth to Kuru King Yudhishthir through the power of Yoga is the form of Dharma Vidur. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)