श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  15.28.11 
विदितं चापि राजेन्द्र विदुरस्य महात्मन:।
गमनं विधिनानेन धर्मस्य सुमहात्मन:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! इसी विधि से आपको महामना धर्म के साक्षात् स्वरूप महात्मा विदुर के परलोक गमन का समाचार अवश्य ज्ञात हुआ होगा। 11॥
 
Rajendra! You must have come to know about the departure of Mahatma Vidur, who was an embodiment of Mahamana Dharma, to the afterlife through this method. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)