Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.27.7-8: उन्होंने देखा कि आश्रमों में यज्ञ वेदियाँ थीं जिन पर अग्निदेव जल रहे थे। ऋषिगण स्नान करके उन वेदियों के पास बैठे थे और अग्नि में आहुति दे रहे थे। वन पुष्पों और घी की आहुति से उठने वाले धुएँ से वे वेदियाँ भी सुशोभित हो रही थीं। वेदों की निरन्तर ध्वनि के कारण वे वेदियाँ वेदों के शरीर से एकाकार प्रतीत हो रही थीं। ऋषियों का समुदाय सदैव उनसे सम्पर्क बनाए रखता था। 7-8। | mahabharat अध्याय 15.27: युधिष्ठिर आदिका ऋषियोंके आश्रम देखना, कलश आदि बाँटना और धृतराष्ट्रके पास आकर बैठना, उन सबके पास अन्यान्य ऋषियोंसहित महर्षि व्यासका आगमन । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन्होंने देखा कि आश्रमों में यज्ञ वेदियाँ थीं जिन पर अग्निदेव जल रहे थे। ऋषिगण स्नान करके उन वेदियों के पास बैठे थे और अग्नि में आहुति दे रहे थे। वन पुष्पों और घी की आहुति से उठने वाले धुएँ से वे वेदियाँ भी सुशोभित हो रही थीं। वेदों की निरन्तर ध्वनि के कारण वे वेदियाँ वेदों के शरीर से एकाकार प्रतीत हो रही थीं। ऋषियों का समुदाय सदैव उनसे सम्पर्क बनाए रखता था। 7-8।
He saw that there were sacrificial altars in the ashrams on which the fire god was burning. The sages were sitting near those altars after taking bath and offering sacrifices in the fire. Those altars were also being adorned by the smoke arising from the offering of forest flowers and ghee. Due to the continuous sound of the Vedas, those altars seemed to be united with the body of the Vedas. The community of sages always kept in touch with them. 7-8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥