Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.27.16-17: वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि राजा धृतराष्ट्र अपने नित्य कर्मों से निवृत्त होकर गांधारी के पास शांत भाव से बैठे हैं और उनसे थोड़ी दूरी पर माता कुंती सभी शिष्टाचार का पालन करते हुए शिष्या की भांति विनम्रतापूर्वक खड़ी हैं।   |   mahabharat अध्याय 15.27: युधिष्ठिर आदिका ऋषियोंके आश्रम देखना, कलश आदि बाँटना और धृतराष्ट्रके पास आकर बैठना, उन सबके पास अन्यान्य ऋषियोंसहित महर्षि व्यासका आगमन   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 27: युधिष्ठिर आदिका ऋषियोंके आश्रम देखना, कलश आदि बाँटना और धृतराष्ट्रके पास आकर बैठना, उन सबके पास अन्यान्य ऋषियोंसहित महर्षि व्यासका आगमन  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  15.27.16-17 
कृताह्निकं च राजानं धृतराष्ट्रं महीपतिम्।
ददर्शासीनमव्यग्रं गान्धारीसहितं तदा॥ १६॥
मातरं चाविदूरस्थां शिष्यवत् प्रणतां स्थिताम्।
कुन्तीं ददर्श धर्मात्मा शिष्टाचारसमन्विताम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि राजा धृतराष्ट्र अपने नित्य कर्मों से निवृत्त होकर गांधारी के पास शांत भाव से बैठे हैं और उनसे थोड़ी दूरी पर माता कुंती सभी शिष्टाचार का पालन करते हुए शिष्या की भांति विनम्रतापूर्वक खड़ी हैं।
 
Reaching there he saw that king Dhritarashtra, after performing his daily rituals was sitting with Gandhari in a calm and composed manner and at a little distance from them mother Kunti, observing all etiquette, was standing humbly like a disciple.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)