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mahabharat 15.26.8-9h: हे पुरुषश्रेष्ठ! क्या आपके राज्य में स्त्रियों, बालकों और वृद्धों को कष्ट सहना पड़ता है? क्या वे अपनी जीविका के लिए भीख नहीं मांगते? क्या आपके घर में सौभाग्यवती बहुओं और पुत्रियों का आदर और सम्मान होता है?॥8 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 15.26: धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा विदुरजीका युधिष्ठिरके शरीरमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.26.8-9h 
कच्चित् स्त्रीबालवृद्धं ते न शोचति न याचते॥ ८॥
जामय: पूजिता: कच्चित् तव गेहे नरर्षभ।
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! क्या आपके राज्य में स्त्रियों, बालकों और वृद्धों को कष्ट सहना पड़ता है? क्या वे अपनी जीविका के लिए भीख नहीं मांगते? क्या आपके घर में सौभाग्यवती बहुओं और पुत्रियों का आदर और सम्मान होता है?॥8 1/2॥
 
O best of men! In your kingdom, do women, children and the aged have to suffer? Do they not beg for their livelihood? Are the fortunate daughters-in-law and daughters respected and honoured in your house?॥ 8 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)