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mahabharat 15.26.35-36: विदुरजी की मृत्यु का यह अद्भुत समाचार सुनकर महाप्रतापी राजा धृतराष्ट्र, भीमसेन आदि सभी लोग अत्यन्त आश्चर्यचकित हुए। तत्पश्चात, राजा ने प्रसन्न होकर धर्मराज युधिष्ठिर से कहा - 'पुत्र! अब तुम मेरे द्वारा दिया गया यह फल, मूल और जल ग्रहण करो।'   |   mahabharat अध्याय 15.26: धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा विदुरजीका युधिष्ठिरके शरीरमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 26: धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा विदुरजीका युधिष्ठिरके शरीरमें प्रवेश  »  श्लोक 35-36
 
 
श्लोक  15.26.35-36 
तत: स राजा द्युतिमान् स च सर्वो जनस्तदा।
भीमसेनादयश्चैव परं विस्मयमागता:॥ ३५॥
तच्छ्रुत्वा प्रीतिमान् राजा भूत्वा धर्मजमब्रवीत्।
आपो मूलं फलं चैव ममेदं प्रतिगृह्यताम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
विदुरजी की मृत्यु का यह अद्भुत समाचार सुनकर महाप्रतापी राजा धृतराष्ट्र, भीमसेन आदि सभी लोग अत्यन्त आश्चर्यचकित हुए। तत्पश्चात, राजा ने प्रसन्न होकर धर्मराज युधिष्ठिर से कहा - 'पुत्र! अब तुम मेरे द्वारा दिया गया यह फल, मूल और जल ग्रहण करो।'
 
Hearing this wonderful news of Vidurji's death, the illustrious king Dhritarashtra and Bhimsen and all others were very surprised. After this, the king became happy and said to Dharmaraja Yudhishthira - 'Son! Now you please accept this fruit, root and water given by me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)