Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.26.20-21: यह देखकर राजा युधिष्ठिर अकेले ही उनके पीछे दौड़े। विदुरजी कभी दिखाई देते, कभी अदृश्य। जब वे घने वन में प्रवेश करने लगे, तब राजा युधिष्ठिर बड़े प्रयत्न से उनकी ओर दौड़े और इस प्रकार बोले - 'हे विदुरजी! मैं, आपका परम प्रिय राजा युधिष्ठिर, आपके दर्शन हेतु आया हूँ।' | mahabharat अध्याय 15.26: धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा विदुरजीका युधिष्ठिरके शरीरमें प्रवेश । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह देखकर राजा युधिष्ठिर अकेले ही उनके पीछे दौड़े। विदुरजी कभी दिखाई देते, कभी अदृश्य। जब वे घने वन में प्रवेश करने लगे, तब राजा युधिष्ठिर बड़े प्रयत्न से उनकी ओर दौड़े और इस प्रकार बोले - 'हे विदुरजी! मैं, आपका परम प्रिय राजा युधिष्ठिर, आपके दर्शन हेतु आया हूँ।'
Seeing this, King Yudhishthira ran after him alone. Vidurji was sometimes visible and sometimes invisible. When he started entering a dense forest, King Yudhishthira ran towards him with great effort and said thus - 'O Vidurji! I, your most beloved King Yudhishthira, have come to see you'.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥