Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.26.18-19: राजा धृतराष्ट्र अभी ऐसा ही कह ही रहे थे कि दूर से जटाधारी और मुँह में पत्थर का टुकड़ा लिए एक दुबले-पतले विदुरजी आते दिखाई दिए। वे नग्न थे। उनका पूरा शरीर मैल से सना हुआ था। वे वन में उड़ती धूल से सने हुए थे। राजा युधिष्ठिर को उनके आगमन की सूचना मिली। हे राजन! विदुरजी उस आश्रम को देखकर अचानक पीछे मुड़े। 18-19. | mahabharat अध्याय 15.26: धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा विदुरजीका युधिष्ठिरके शरीरमें प्रवेश । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा धृतराष्ट्र अभी ऐसा ही कह ही रहे थे कि दूर से जटाधारी और मुँह में पत्थर का टुकड़ा लिए एक दुबले-पतले विदुरजी आते दिखाई दिए। वे नग्न थे। उनका पूरा शरीर मैल से सना हुआ था। वे वन में उड़ती धूल से सने हुए थे। राजा युधिष्ठिर को उनके आगमन की सूचना मिली। हे राजन! विदुरजी उस आश्रम को देखकर अचानक पीछे मुड़े। 18-19.
King Dhritarashtra was still speaking like this when a thin Vidurji with matted hair and a piece of stone in his mouth was seen coming from a distance. He was naked. His whole body was covered with dirt. He was covered with dust flying in the forest. King Yudhishthira was informed about his arrival. O King! Vidurji suddenly turned back after looking at that ashram. 18-19.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥