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mahabharat 15.26.16: वैशम्पायन कहते हैं - जब राजा युधिष्ठिर ने यह पूछा, तो धृतराष्ट्र ने उनसे कहा - 'बेटा! विदुर जी कुशल से हैं। वे अत्यन्त कठोर तपस्या में लीन हैं।'   |   mahabharat अध्याय 15.26: धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा विदुरजीका युधिष्ठिरके शरीरमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.26.16 
वैशम्पायन उवाच
इत्युक्त: प्रत्युवाचेदं धृतराष्ट्रो जनाधिपम्।
कुशली विदुर: पुत्र तपो घोरं समाश्रित:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जब राजा युधिष्ठिर ने यह पूछा, तो धृतराष्ट्र ने उनसे कहा - 'बेटा! विदुर जी कुशल से हैं। वे अत्यन्त कठोर तपस्या में लीन हैं।'
 
Vaishmpayana says - When King Yudhishthira asked this, Dhritarashtra told him - 'Son! Vidur ji is well. He is engaged in very severe penance. 16.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)