श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 25: संजयका ऋषियोंसे पाण्डवों, उनकी पत्नियों तथा अन्यान्य स्त्रियोंका परिचय देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  15.25.19 
योधेषु वाप्याश्रममण्डलं तं
मुक्त्वा निविष्टेषु विमुच्य पत्रम्।
स्त्रीवृद्धबाले च सुसंनिविष्टे
यथार्हतस्तान् कुशलान्यपृच्छत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
पाण्डव सैनिकों ने आश्रम की सीमा छोड़कर कुछ दूर पर अपने सब वाहन उतारकर वहीं डेरा डाल दिया। स्त्रियाँ, वृद्ध और बालक शिविर में सुखपूर्वक विश्राम करने लगे। उस समय राजा धृतराष्ट्र पाण्डवों से मिले और उनका कुशलक्षेम पूछने लगे॥19॥
 
The Pandava soldiers left the boundary of the ashram and unloaded all their vehicles some distance away and camped there. The women, the elderly and the children started resting comfortably in the camp. At that time King Dhritarashtra met the Pandavas and started asking about their well-being.॥ 19॥
 
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि ऋषीन् प्रति युधिष्ठिरादिकथने पञ्चविंशोऽध्याय:॥ २५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें ऋषियोंके प्रति युधिष्ठिर आदिका परिचयविषयक पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)