श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 25: संजयका ऋषियोंसे पाण्डवों, उनकी पत्नियों तथा अन्यान्य स्त्रियोंका परिचय देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  15.25.17 
एता यथामुख्यमुदाहृता वो
ब्राह्मण्यभावादृजुबुद्धिसत्त्वा:।
सर्वा भवद्भि: परिपृच्छ्यमाना
नरेन्द्रपत्न्य: सुविशुद्धसत्त्वा:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणत्व के प्रभाव से सरल बुद्धि और शुद्ध हृदय वाले महर्षियों! आपने इन सबका परिचय पूछा था, अतः मैंने उनमें से मुख्य-मुख्य पुरुषों का परिचय दिया है। ये सभी राज-पत्नियाँ शुद्ध हृदय वाली हैं॥ 17॥
 
O great sages, who have simple intellect and pure heart due to the influence of brahminhood! You had asked for the introduction of all of them; therefore, I have introduced the main persons among them. All these royal wives have pure hearts.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)